part 2 : शादी की पहली सुबह सास ने मेरी 1.5 लाख की डिशवॉशर बेच दी, पर जब शाम को मैंने पूरा घर खाली कर दिया तो उनकी चीख निकल गई! //

विकास ने झपटकर मेरे हाथ से वह कागज़ छीना।

उसके चेहरे की रंगत पल भर में उड़ गई।

“यह… यह तो इस फ्लैट का पज़ेशन और रेंट एग्रीमेंट है,” विकास की आवाज़ लड़खड़ाने लगी।

मालती देवी ने आगे बढ़कर कागज़ देखा, “क्या लिखा है इसमें विकास? यह लड़की क्या बकवास कर रही है?”

मैंने अपने बैग से लैपटॉप निकाला और उसे फ्लोर पर रखते हुए कहा, “बकवास मैं नहीं, आप लोग कर रहे थे।”

“यह फ्लैट विकास के नाम पर नहीं है मम्मी जी।”

“शादी से 6 महीने पहले इस फ्लैट का डाउनपेमेंट 25 लाख रुपये मैंने दिया था।”

“बाकी का लोन विकास के नाम पर है, लेकिन उसकी हर महीने की 45,000 रुपये की ईएमआई मेरे अकाउंट से ऑटो-डेबिट होती है।”

“और इस एग्रीमेंट के मुताबिक, अगर 2 महीने भी ईएमआई बाउंस हुई, तो बिल्डर इस संपत्ति का पज़ेशन रद्द कर देगा।”

मालती देवी का चेहरा सफेद पड़ गया।

वह विकास की तरफ मुड़ीं, “विकास! क्या यह सच कह रही है? तूने तो कहा था यह घर पूरी तरह तेरा है!”

विकास नज़रें चुराने लगा, “माँ… वो… डाउनपेमेंट के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, इसलिए नेहा ने मदद की थी…”

“मदद नहीं विकास, मैंने पूरा पैसा लगाया था,” मैंने उसकी बात काटी।

“और जिस डिशवॉशर को आपकी माँ ने 12,000 रुपये में बेचा, उसका बिल 1,48,000 रुपये का था।”

“मैंने उस दुकान वाले को कॉल करके सीसीटीवी फुटेज और रसीद मँगवा ली है।”

मैंने अपने फोन की स्क्रीन मालती देवी के सामने कर दी।

उसमें साफ दिख रहा था कि मालती देवी ने अपने कज़न के बेटे को वह डिशवॉशर महज़ 12,000 रुपये में बेचा था।

“आपने कोई बचत नहीं की मम्मी जी,” मैंने कहा।

“आपने अपने रिश्तेदार को फायदा पहुँचाने के लिए मेरा 1.5 लाख का सामान कौड़ियों के भाव बेच दिया।”

मालती देवी गुस्से में काँपने लगीं, “तुम… तुम अपनी सास पर चोरी का इल्ज़ाम लगा रही हो?”

“इल्ज़ाम नहीं, यह सबूत है,” मैंने शांति से कहा।

“और अब सुनिए कि आगे क्या होने वाला है।”

मैंने अपने फोन से एक और एग्रीमेंट की कॉपी निकाली।

“मैंने आज सुबह ही बिल्डर और बैंक को ईएमआई का ऑटो-डेबिट कैंसिलेशन फॉर्म भेज दिया है।”

“अगले महीने से इस घर की 45,000 रुपये की किश्त मेरे खाते से नहीं कटेगी।”

“विकास की सैलरी 55,000 रुपये है।”

“अगर वह 45,000 रुपये ईएमआई देगा, तो 10,000 रुपये में आप दोनों का महीने का राशन, बिजली का बिल और हाथ से कपड़े धोने वाले साबुन का खर्चा कैसे चलेगा?”

विकास के हाथ-पाँव फूल गए।

वह तुरंत मेरे सामने हाथ जोड़ने लगा, “नेहा! प्लीज ऐसा मत करो! बैंक मेरा फ्लैट सीज कर देगा!”

“तो करने दो विकास,” मैंने कहा।

“तुमने सुबह ही कहा था ना कि पुरानी ज़िंदगी में बहुत सादगी थी?”

“अब तुम और तुम्हारी माँ बिना किसी लग्जरी के, बिना फ्रिज, बिना एसी और बिना इस महंगे फ्लैट के आराम से सादा जीवन बिताओ।”

मालती देवी का सारा घमंड पल भर में टूट गया।

वह ज़मीन पर बैठ गईं, “नेहा बेटी… मुझसे गलती हो गई… मैं तो बस तुम्हें घर के काम सिखा रही थी…”

“घर के काम सिखाना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करके अपना गुलाम बनाना, दो अलग बातें हैं मम्मी जी,” मैंने कहा।

“आपको लगता था कि शादी के बाद लड़की मजबूर हो जाती है और जो भी अन्याय होगा, सह लेगी।”

“लेकिन मैं एक आत्मनिर्भर औरत हूँ।”

“मैं कैटरपिलर इंजनों का हिसाब रख सकती हूँ, तो अपनी ज़िंदगी का हिसाब करना भी अच्छी तरह जानती हूँ।”

तभी बाहर एक गाड़़ी आकर रुकी।

दरवाज़े पर मेरे ससुर यानी मालती देवी के पति जगन्नाथ जी खड़े थे, जो गाँव से आए थे।

उनके साथ विकास का बड़ा भाई भी था।

घर की हालत देखकर जगन्नाथ जी सन्न रह गए।


“यह सब क्या हो रहा है यहाँ? सारा सामान कहाँ है?” उन्होंने पूछा।

मैंने बिना किसी झिझक के शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी बात जगन्नाथ जी को बता दी।

मैंने उन्हें डिशवॉशर का बिल, बिक्री की रसीद और खाली पड़े घर की तस्वीरें दिखाईं।

जगन्नाथ जी ने मालती देवी की तरफ देखा, उनकी आँखों में गहरा गुस्सा था।

“मालती! क्या तुम पागल हो गई हो?!” जगन्नाथ जी चिल्लाए।

“बहू अपने पैसों से सामान लाई थी, तुमने उसकी चीज़ बिना पूछे कैसे बेच दी?”

“और विकास! तू मर्द है या अपनी माँ की गलत बातों में हाँ में हाँ मिलाने वाला पुतला?”

“जिस लड़की ने तेरे घर का डाउनपेमेंट भरा, तू उसी को नीचा दिखा रहा था?”

विकास सिर झुकाए खड़ा रहा, उसके पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं थे।

जगन्नाथ जी मेरे पास आए और हाथ जोड़कर बोले, “बेटी, मुझे माफ कर दो। मुझे नहीं पता था कि ये दोनों पीछे से ऐसा नीच काम करेंगे।”

मैंने जगन्नाथ जी को प्रणाम किया, “पापा जी, आपकी कोई गलती नहीं है। लेकिन मैं इस शादी को ऐसे माहौल में आगे नहीं बढ़ा सकती जहाँ मेरी कोई इज़्ज़त न हो।”

मैंने अपने बैग से डिवोर्स पेपर्स निकाले और टेबल पर रख दिए।

“विकास, इन कागज़ों पर दस्तखत कर दो।”

“अगर तुमने सीधे-सीधे दस्तखत नहीं किए, तो मैं धोखाधड़ी और मेंटल हैरेसमेंट का केस दर्ज कराऊँगी।”

“मेरे पास डाउनपेमेंट की रसीदें, डिशवॉशर की चोरी की फुटेज और तुम्हारे सुबह के बर्ताव की कॉल रिकॉर्डिंग सब सुरक्षित है।”

विकास फूट-फूटकर रोने लगा, “नेहा, मुझे एक मौका दे दो! मैं माँ को अभी गाँव वापस भेज देता हूँ! हम दोनों अलग रहेंगे!”

मालती देवी ने यह सुना तो उनका मुँह खुला का खुला रह गया, “विकास! तू अपनी माँ को निकालेगा?!”

मैंने विकास की तरफ देखा, मेरी आँखों में उसके लिए सिर्फ घृणा थी।

“विकास, जो इंसान अपनी माँ की गलत बात पर अपनी पत्नी को नीचा दिखा सकता है, वह कल अपनी माँ को भी छोड़ सकता है।”

“मुझे ऐसे कमजोर और रीढ़हीन इंसान के साथ अपनी ज़िंदगी बर्बाद नहीं करनी।”

जगन्नाथ जी ने विकास के सिर पर एक थप्पड़ मारा, “दस्तखत कर इस पर! तू इस काबिल ही नहीं है कि नेहा जैसी समझदार लड़की तेरे साथ रहे।”

काँपते हाथों से विकास ने डिवोर्स पेपर्स पर साइन कर दिए।

अमित की टीम ने मेरा बचा हुआ पर्सनल सामान और लैपटॉप बैग गाड़ी में रखा।

मैंने अपना पर्स उठाया और दरवाज़े की तरफ बढ़ी।

जाते-जाते मैंने मालती देवी की तरफ देखा, जो खाली फर्श पर बैठी रो रही थीं।

“मम्मी जी, आपके 12,000 रुपये टेबल पर रखे हैं।”

“इन्हीं पैसों से साबुन की बट्टियाँ खरीद लीजिएगा, क्योंकि अब आपको और विकास को इस खाली घर के बर्तन और कपड़े खुद ही हाथ से धोने पड़ेंगे।”

मैं बिना पीछे मुड़े बाहर निकल आई।

गाड़ी में बैठकर मैंने अपने फोन से बैंक को मैसेज किया और अपने सारे ट्रांसफर रोक दिए।

सूरज की धूप मेरे चेहरे पर पड़ रही थी, और पहली बार शादी के बाद मुझे लगा कि मैंने अपनी आज़ादी और स्वाभिमान को पूरी तरह बचा लिया है।

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