दोस्तों पति को साधारण आदमी समझकर तलाकशुदा पत्नी ने उड़ाया मजाक। मगर जब सच्चाई सामने आई तो पूरा एयरपोर्ट सन रह गया। दोस्तों, यह सच्ची कहानी है मुंबई की। जहां एक एयरपोर्ट पर काव्या शर्मा अपने हाथ में कॉफी पकड़े खड़ी थी। उसके साथ खड़ा था राहुल मेहरा। महंगे कपड़े, आत्मविश्वास भरी चाल और चेहरे पर घमंड साफ झलक रहा था। तभी कव्या की नजर सामने खड़े एक आदमी पर पड़ी। साधारण कपड़े, शांत चेहरा बिना किसी हड़बड़ी के खड़ा हुआ और कव्या के चेहरे पर अचानक एक हल्की सी मुस्कान आई जो धीरे-धीरे हंसी में बदल गई। राहुल, देखो उसने धीरे से कहा, “यह वही
आदमी है जिससे मैंने शादी की थी।” राहुल ने उसकी तरफ देखा। कुछ सेकंड तक अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा और फिर हल्का सा हंस पड़ा। सीरियसली तुमने इससे शादी की थी। उसने तंज कसते हुए कहा। काव्या ने कॉफी का घुंट लिया और बिना झिझक के बोली, हां। और मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी यह। अर्जुन बस कुछ ही कदम दूर खड़ा था। उनकी आवाजें उसके कानों तक साफ पहुंच रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वह बस खामोश खड़ा रहा जैसे यह सब उसके लिए नया नहीं हो। काव्या आगे बढ़ी और जानबूझकर बोली, “कैसे हो अर्जुन, अभी भी वैसे ही
हो।” या थोड़ा बदल गए। अर्जुन ने उसकी तरफ देखा। हल्की सी मुस्कान दी और कहा, ठीक हूं। बस इतना ही ना कोई शिकायत ना कोई सवाल। राहुल हंसते हुए बोला, “यार काव्या, तुमने बताया नहीं कि तुम्हारा एक्स इतना सिंपल है।” सिंपल नहीं राहुल बिल्कुल बेकार। काव्या ने तुरंत जवाब दिया। उसकी आवाजों में तिरस्कार साफ था। इस आदमी से मैंने सोचा था कि जिंदगी बनेगी लेकिन यह तो खुद ही कुछ कर नहीं पाया। उसने बिना रुके हुए कहा, “अर्जुन अब भी शांत खड़ा था। उसकी आंखों में कोई गुस्सा नहीं था। बस एक अजीब सी शांति थी। राहुल उसके करीब आया और बोला, भाई, बुरा मत मानना। लेकिन
सच में तुम काव्या के लायक कभी थे ही नहीं। कुछ पल के लिए वहां सन्नाटा छा गया। लेकिन उस सन्नाटे में भी अर्जुन के चेहरे पर वही हल्की मुस्कान बनी रही। शायद उसने धीरे से कहा, बस एक शब्द और फिर वह चुप हो गया। कव्या झुंझुलाकर बोली देखा राहुल यही प्रॉब्लम थी इसमें कभी बोलता ही नहीं था राहुल हंस पड़ा अच्छा हुआ तुमने टाइम रहते हुए फैसला ले लिया कव्या ने सिर हिलाया हां वरना आज भी इसी के साथ फंसी होती तभी पास से अनाउंसमेंट की आवाज आई फ्लाइट नंबर 782 लंदन बोर्डिंग व्हील स्टार्ट शली भीड़ और तेजी से हिलने लगी लेकिन उस छोटे से
दायरे में खड़े तीन लोगों के बीच माहौल अब भी भारी था कव्या ने आखिरी एक बार अर्जुन को देखा और ताना मारा। वैसे अर्जुन अब क्या कर रहे हो या अभी भी कुछ नहीं। अर्जुन ने हल्का सा सिर झुकाया। फिर नजर उठाई और बोला जो करना था वह कर लिया। कव्या ने भवे सिकोर ली। मतलब लेकिन अर्जुन ने कोई जवाब नहीं दिया। बस वही मुस्कान और कव्या उस मुस्कान को देखती रह गई। वही शांत स्थिर अजीब सी मुस्कान जैसे उसके पीछे कोई ऐसा सच छुपा हो जिसे समझने की कोशिश कव्या ने कभी की ही नहीं। और शायद अब बहुत देर हो चुकी थी और उसी मुस्कान के साथ कहानी पीछे लौटती है उस समय में जब सब
कुछ सच में बहुत सरल था। इतना सरल कि शायद काव्या ने उसकी कीमत कभी समझी ही नहीं। शादी के शुरुआती दिन बिल्कुल अलग थे। हर सुबह एक नई उम्मीद लेकर आती थी और हर हर रात एक सुकून के साथ खत्म होती थी। काव्या की आंखों में बड़े सपने थे। एक बेहतर जिंदगी, एक बड़ा घर, एक पहचान और अर्जुन की आंखों में बस एक ही चीज थी। सुकून। उसे लगता था कि अगर साथ सही हो तो जिंदगी अपने आप आसान हो जाती है। दिल्ली के एक छोटे लेकिन साफ सुथरे फ्लैट में दोनों अपनी नई जिंदगी की शुरुआत की थी। घर भरा नहीं था। लेकिन उसमें अपनापन था। दीवारों पर ज्यादा
सजावट नहीं थी। लेकिन हर कोना उनके साथ एहसासों से भरा हुआ था। अर्जुन ज्यादा बोलता नहीं था। लेकिन उसकी खामोशी में भी बहुत कुछ था। सुबह काव्या को उठने से पहले चाय बनाकर रखना, बिना कहे उसके छोटे-छोटे काम कर देना, देर रात तक काम करने के बाद भी मुस्कुराकर उसके साथ बैठना यह सब उसके प्यार जताने के तरीके थे। वह कभी बड़े-बड़े वादे नहीं करता था। लेकिन जो भी करता था, चुपचाप और सच्चाई से करता था। शुरुआत में कव्या को यह सब अच्छा लगता था। उसे अर्जुन की सादगी में एक अलग ही अपनापन दिखता था। लेकिन धीरे-धीरे उसके अंदर कुछ बदलने लगा। बाहर की दुनिया उसे खींचने
लगी। सोशल मीडिया पर दिखने वाली चमकदमक, दोस्तों की लाइफस्ट, महंगे गिफ्ट्स, बड़ी गाड़ियां यह सब उसे अपनी जिंदगी से ज्यादा बेहतर लगने लगा। उसे लगने लगा कि उसकी जिंदगी कहीं पीछे छूट रही है। घर का सादापन अब उसे सुकून नहीं देता था बल्कि बोझ लगने लगा था। समय के साथ यह एहसास धीरे-धीरे असंतोष में बदल गया। काव्या अब हर छोटी बातों में कमी ढूंढने लगी। उसने अर्जुन से सवाल पूछने शुरू किए। तुम आखिर करते क्या हो? इतने साल हो गए तुमने हासिल क्या किया? अर्जुन हर बार मुस्कुराकर बात को टाल देता या बस इतना कहता सब ठीक हो जाएगा। लेकिन यही जवाब काव्या को सबसे
ज्यादा चिढ़ाने लगे। उसे लगता था कि अर्जुन में कोई महत्वाकांक्षा ही नहीं है। जैसे उसे जिंदगी में आगे बढ़ने की कोई चाय ही नहीं है। धीरे-धीरे उनके बीच की दूरी बढ़ने लगी। जहां पहले बातें होती थी, वहां अब चुप्पी रहने लगी। जहां पहले साथ में हंसी थी, वहां अब ताने और शिकायतें आ गई। काव्या अब अपने दोस्तों से तुलना करने लगी। देखो उनके पति क्या-क्या कर रहे हैं। और एक तुम हो। यह लाइन अब उसके मुंह से अक्सर निकलने लगी। हर दिन एक नया ताना, हर रात एक नया झगड़ा। अर्जुन फिर भी शांत रहता जैसे उसे इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन सच यह था कि उसे फर्क पड़ता
था बहुत गहराई से। बस वह उसे दिखाना नहीं चाहता था। वह हर बार सोचता था कि शायद यह सिर्फ एक फेज है। शायद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ते गए। काव्या का गुस्सा अब उसके शब्दों में साफ दिखाई देने लगा था। एक दिन बात इतनी बढ़ गई कि झगड़ा हद पार कर गया। कव्या ने गुस्से में कहा, “तुमसे कुछ नहीं होगा अर्जुन, तुम बस एक फेल आदमी हो। यह शब्द कमरे में गूंजते रहे। जैसे किसी ने दीवारों पर चोट कर दी हो। कुछ पल के लिए सब कुछ शांत हो गया। अर्जुन ने उसकी आंखों में देखा जैसे वह कुछ कहना चाहता हो। जैसे वो उसे समझाना चाहता हो। लेकिन फिर उसने
खुद को रोक लिया। उसने नजरें झुका ली। शायद उसे समझ आ गया था कि अब शब्दों का कोई मतलब नहीं रहा। उसी रात कव्या ने फैसला कर लिया कि अब वह इस रिश्ते में नहीं रह सकती। उसके लिए यह रिश्ता अब एक बोझ बन चुका है। अगले ही दिन उसने तलाक की बात रख दी। अर्जुन ने ना कोई सवाल किया ना कोई गुस्सा दिखाया ना ही उसे रोकने की कोशिश की। उसने सिर्फ एक बात पूछी। क्या यह तुम्हारा आखिरी फैसला है? काव्या ने बिना एक पल सोचे हां कह दिया। उस एक हां ने सालों का रिश्ता खत्म कर दिया। उस एक शब्द ने वह सब तोड़ दिया जो कभी खूबसूरत था। कोर्ट का दिन आ गया। माहौल शांत था
लेकिन उस खामोशी में बहुत कुछ टूट रहा था। कागज सामने रखे थे और सिर्फ एक साइन से सब खत्म हो जाना था। काव्या के चेहरे पर अजीब आत्मविश्वास था। जैसे उसने सही फैसला लिया हो। उसे लग रहा था कि अब उसकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी। अब वह सब कुछ पा सकेगी जो वह चाहती थी। अर्जुन ने पेन उठाया। एक बार फिर उसकी तरफ देखा और बिना कुछ कहे साइन कर दिया। ना कोई सवाल, ना कोई बहस, ना कोई आंसू। जैसे उसे पहले से ही पता था कि यह दिन आएगा जैसे उसने पहले ही सब स्वीकार कर लिया हो। काव्या ने भी साइन किए और उठते हुए आखिरी बार कहा, तुम जिंदगी में कभी
आगे बढ़ नहीं पाओगे। तुम जैसे लोग हमेशा वहीं के वहीं रह जाते हैं। अर्जुन ने उस वक्त भी कुछ नहीं कहा। बस वही हल्की सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। वही मुस्कान जो बाद में उसकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाली थी। कुट से बाहर निकलते हुए दोनों के रास्ते अलग हो गए। काव्या तेज कदमों से आगे बढ़ गई। जैसे वह किसी बोझ से मुक्त हो गई हो। उसने पीछे मुड़कर देखने की जरूरत भी नहीं समझी। उसके लिए यह अध्याय खत्म हो चुका था। अर्जुन वहीं कुछ पल खड़ा रहा। लोगों की भीड़ उसके पास से गुजरती रही। लेकिन वह वही स्थिर था। उसके चेहरे पर ना गुस्सा था ना दुख। बस वही शांत मुस्कान।
लेकिन उस दिन उसकी खामोशी पहले जैसी नहीं थी। उसमें अब एक फैसला था। एक दिशा थी, एक बदलाव था। उसने कुछ नहीं कहा। लेकिन उसने सब समझ लिया था। उसने यह समझ लिया था कि जिंदगी में हर जवाब शब्दों से नहीं दिया जाता। कुछ जवाब वक्त देता है और शायद उसी पल ने उसने अपनी जिंदगी की एक नई दिशा देने का फैसला कर लिया था बिना किसी को बताए बिना किसी शोर के ठीक उसी तरह जैसे वह हमेशा करते आया था और वही खामोशी वही सादगी वही मुस्कान आगे चलकर एक ऐसी सच्चाई बनने वाली थी जिसे सुनकर हर कोई सन रह जाता है और कहानी फिर से उसी एयरपोर्ट पर लौटती है जहां कुछ मिनट पहले तक सब कुछ
सामान लग रहा था। काव्या और राहुल अभी भी वहीं खड़े थे। लेकिन अब माहौल पहले जैसा बिल्कुल नहीं रहा था। कुछ ही मिनट पहले तक जहां हंसी, ताने और घमंड था, वहां अब एक अजीब सा सन्नाटा उतर आया था। कव्या के नजर बार-बार अर्जुन पर जा रही थी। वो अब भी उतनी ही शांति से खड़ा था जैसे उसे किसी चीज की कोई जल्दी ही नहीं हो। उसके चेहरे पर वही हल्की मुस्कान थी। लेकिन अब वही मुस्कान काव्या के अंदर बेचैनी पैदा कर रही थी। उसे लग रहा था कि इस मुस्कान के पीछे कुछ ऐसा छुपा है जिसे वह कभी समझ ही नहीं पाई। उसके दिल की धड़कन तेज होने लगी
और उसे खुद समझ ही नहीं आ रहा था आखिर उसे ऐसा क्यों महसूस हो रहा है। तभी अचानक माहौल में हलचल हुई। दो सिक्योरिटी अधिकारी तेजी से अर्जुन की तरफ बढ़े। उनके कदम में जल्दीबाजी थी। लेकिन चेहरे पर घबराहट नहीं सम्मान था। जैसे वह किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के पास जा रहे हो। कव्या ने पहले तो ध्यान नहीं दिया लेकिन जैसे ही वे दोनों अर्जुन के सामने आकर हल्का सा झुके और बोले सर आपकी बोर्डिंग क्लियर हो चुकी है। अब सीधे आगे बढ़ सकते हैं। उसकी आंखें एकदम फैल गई। उसके हाथ में पकड़ा कॉफी का कप हल्का सा कांप गया। उसने कप को कसकर पकड़ लिया। लेकिन उसके
अंदर का संतुलन अब बिगड़ चुका था। राहुल ने तुरंत हंसते हुए बीच में बोलना चाहा। शायद आप लोग गलत आदमी को पहचान रहे हैं। यह सर्न नहीं है। उसकी आवाज में अभी भी वही पुराना घमंड था। लेकिन अब उसमें हल्की सी घबराहट भी शामिल हो गई थी। सिक्योरिटी अधिकारी ने उसकी तरफ देखा तक नहीं। उनकी नजरें सिर्फ अर्जुन पर थी। जैसे बाकी दुनिया उनके लिए मायने रखती ही नहीं। अर्जुन ने बहुत ही सहज तरीके से हल्का सा सर हिलाया। जैसे यह सब उसके लिए बिल्कुल आम बात हो। ना कोई हैरानी ना कोई उस्ताप। बस एक सादा सा स्वीकार। तभी एक और आदमी तेजी से उनकी तरफ आया। उसके हाथ में
टेबलेट और कुछ जरूरी कागज थे। वह सीधे अर्जुन के पास रुका और बोला, “सर, आपकी फ्लाइट पूरी तरह क्लियर है। पायलट आपका इंतजार कर रहा है।” उसकी आवाज में इतना सम्मान था कि आसपास खड़े लोग भी अब ध्यान देने लगे थे। कुछ लोग वहीं रुक गए। कुछ एक दूसरे से फुसफुसा कर पूछने लगे। कौन है यह? मोहल में अब हलचल बढ़ चुकी थी। काव्या के चेहरे से हंसी पूरी तरह गायब हो चुकी थी। उसकी जगह अभ्या अजीब सा डर और पछतावा धीरे-धीरे पनप रहा था। कौन सी फ्लाइट? राहुल ने इस बार थोड़ी गंभीर आवाज में पूछा। अब उसकी आवाज में पहले जैसा आत्मविश्वास नहीं था। वह जवाब सुनना चाहता
था, लेकिन शायद डर भी रहा था। उस आदमी ने बिना रुके जवाब दिया, “सर की प्राइवेट फ्लाइट। यह शब्द जैसे हवा में जम गई। राहुल का चेहरा सख्त हो गया। उसकी आंखों में अविश्वास साफ दिखाई देने लगा। उसने अर्जुन को देखा वही साधारण कपड़े वही शांत चेहरा लेकिन अब वह साधारण नहीं लग रहा था। कब्या की सांसे तेज हो गई। उसके दिमाग में उसके अपने ही शब्द गुजने लगे। वह ताने वो अपमान घमंड जो उसने कभी अर्जुन के सामने दिखाया था। उसे वह हर पल याद आने लगा जब उसने अर्जुन को नीचा दिखाया था। वह हर बार जब उसने कहा था तुम कुछ नहीं कर सकते। वह हर दिन जब उसने उसकी शादी का मजाक बनाया
था। अब वही सादगी उसके सामने एक ऐसी ताकत बनकर खड़ी थी जिसे वह समझ नहीं पा रही थी। उसका दिल जैसे अंदर से टूटने लगा उसे पहली बार महसूस हुआ कि शायद उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है। ऐसी गलती जिसे अब सुधारा नहीं जा सकता। तभी सिक्योरिटी गार्ड अधिकारी ने फिर से कहा सर मीडिया को आपकी लोकेशन का पता नहीं चला है। हम आपको सीधे बैक गेट से ले जाएंगे। यह सुनते ही राहुल ने धीरे से एक कदम पीछे लिया। अब उसके चेहरे का घमंड पूरी तरह गायब हो चुका था। उसकी जगह अब डर और असहजता ने ले ली थी। उसने धीरे से काव्या से पूछा, ये ये आखिर कौन है? लेकिन काव्या के पास कोई जवाब
नहीं था। उसकी आंखें सिर्फ अर्जुन पर टिकी थी। जैसे वो पहली बार उसे असली रूप में देख रही हो। अर्जुन ने एक बार उसकी तरफ देखा। वही नजर जिसमें ना गुस्सा था, ना ताना, ना कोई जीत का अहंकार। बस एक शांत सच्चाई थी। जैसे वह सब कुछ समझ चुका हो और अब उसे कुछ साबित करने की जरूरत ना हो। कव्या उस नजर को सहन नहीं कर पा रही थी। उसे लग रहा था जैसे उसकी हर गलती उसके सामने खड़ी हो गई हो। उसके अंदर कुछ टूट रहा था बहुत गहराई से। कुछ ही पलों में सिक्योरिटी गार्ड ने आसपास की भीड़ों को थोड़ा पीछे किया और अर्जुन के लिए रास्ता साफ कर दिया। लोग अब खुलकर उसकी तरफ देखने
लगे थे। कोई हैरान था। कोई प्रभावित, कोई बस जानना चाहता था कि यह आदमी है कौन? लेकिन काव्या के लिए अब यह सवाल मायने नहीं रखता था क्योंकि जवाब उसके सामने था। अर्जुन बिना कुछ बोले आगे बढ़ने लगा। उसके कदम बिल्कुल स्थिर थे जैसे उसे पता हो कि उसे कहां जाना है। उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। काव्या वहीं खड़ी रह गई। उसके हाथ अब खाली थे। कॉफी का कब कब नीचे गिरा उसे पता ही नहीं चला। उसकी आंखें नम थी लेकिन आंसू अभी भी बाहर नहीं आए थे। शायद दर्द इतना गहरा था कि आंसू भी रास्ता भूल गए थे। राहुल अब पूरी तरह खामोश था। उसने एक बार अर्जुन को जाते हुए देखा। फिर काव्या
की तरफ देखा और नजरें झुका ली। उसके लिए भी यह सच्चाई किसी झटके से कम नहीं थी। लेकिन वह कुछ कह नहीं पा रहा था। अर्जुन धीरे-धीरे भीड़ से दूर होता चला गया और फिर नजरों से ओझोल हो गया। लेकिन उसके जाने के बाद जो सन्नाटा रह गया वह पहले से कहीं ज्यादा भारी था। पूरे एयरपोर्ट की नजरें अभी भी उसी दिशा में थी जहां से वह गया था और उस भीड़ के बीच खड़ी काव्या पहली बार खुद को बहुत छोटा महसूस कर रही थी क्योंकि जिसे उसने ठुकराया था वही आज सबसे ऊपर खड़ा था और उसी एहसास के साथ काव्या की दुनिया धीरे-धीरे बिखरने लगी। एयरपोर्ट की वह भीड़, वह आवाजें, वह
हलचल, सब कुछ धुंधला सा हो गया था। अर्जुन आगे बढ़ चुका था और काव्या वहीं खड़ी रह गई थी। जैसे उसके पैरों में किसी ने जंजीर बांध दी हो। राहुल ने उसका हाथ पकड़ा। लेकिन इस बार उसका स्पर्श वैसा नहीं था जैसे पहले हुआ करता था। उसमें अपनापन नहीं था। बस एक अजीब सी दूरी थी। चलो यहां से। उसने धीरे से कहा। कव्या बिना कुछ बोले उसके साथ चल पड़ी। लेकिन उसके मन में सिर्फ एक ही चेहरा बार-बार उभर रहा था। अर्जुन का वही शांत चेहरा, वही मुस्कान जो उसे अभी भी चुभ रही थी। घर पहुंचने के बाद सब कुछ बदल चुका था। पहले जहां राहुल का हर शब्द मीठा लगता था। अब वही बातें खाली
और ठंडी लगने लगी थी। काव्या ने हिम्मत जुटाकर उससे कहा, राहुल मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है। राहुल फोन में व्यस्त था। उसने बिना ऊपर देखे कहा हां बोलो काव्या कुछ पल चुप रही फिर धीरे से बोली क्या तुम मुझसे शादी करोगे यह सवाल सुनते ही राहुल ने फोन नीचे रखा और पहली बार उसकी आंखों में सीधे देखा लेकिन उस नजर में ना प्यार था ना अपनापन बस एक सख्त सच्चाई थी शादी उसने हल्की सी हंसी के साथ कहाव्या तुम सीरियस हो कव्या का दिल तेजी से धड़कने लगा हां मैं सीरियस हूं उसने कहा राहुल ने गाड़ी सांस ली और सोफे से उठकर खड़ा हो गया। देखो काव्या मैं
तुम्हें झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता। उसकी आवाज अब ठंडी थी। मैंने कभी भी तुमसे शादी के बारे में सोचा ही नहीं। यह सुनते ही काव्या जैसे अंदर से हिल गई। मतलब उसकी आवाज कांप गई। राहुल बिना किसी झिझक के कहा। मतलब यह कि तुम मेरे लिए बस एक टाइम पास थी और कुछ नहीं। यह शब्द जैसे उसके दिल में सीधे उतर गए। काव्या की आंखों से आंसू गिरने लगे। राहुल तुम ऐसा कैसे कह सकते हो? राहुल ने कंधे उचकाय, सच यही है और सच यह भी है कि जिस आदमी को तुमने छोड़ा, मैं उसके सामने कुछ भी नहीं हूं। इतना कहकर उसने अपना फोन उठाया और दरवाजे की तरफ बढ़ गया। दरवाजा बंद होने की आवाज
ने पूरे कमरे में सन्नाटा भर दिया। कव्या वहीं खड़ी रह गई। अकेली बिल्कुल अकेली ना राहुल, ना अर्जुन बस एक खाली कमरा और टूटे हुए सपने। उसने धीरे-धीरे जमीन पर बैठते हुए अपना चेहरा हाथों में छुपा लिया। उसे अपने हर शब्द याद आने लगे। वो ताने, वह अपमान, वो घमंड सब कुछ जैसे लौट कर उसे चोट पहुंचा रहा था। रात भर वह सो नहीं पाई। सुबह होते-होते उसने एक फैसला लिया। उसे अर्जुन से मिलना है। उससे माफी मांगनी है। शायद अभी भी कुछ बचा हो। अगले ही दिन वह अर्जुन के ऑफिस पहुंची। ऊंची इमारत, हाई सिक्रेटरी हर जगह एक अलग ही माहौल। उसे अंदर जाने में मुश्किल हुई। लेकिन जब
उसने अपना नाम बताया तो कुछ देर बाद उसे अंदर बुला लिया गया। अर्जुन अपने केबिन में बैठा था। वही शांत चेहरा लेकिन अब उसके चारों तरफ एक अलग ही रौब था। काव्या उसे देखते ही टूट गई। अर्जुन उसकी आवाज भररा गई। अर्जुन ने सिर उठाया। उसे देखा। कुछ पल के लिए खामोशी छा गई। काव्या उसकी तरफ बढ़ी और रोते हुए बोली मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। मैंने तुम्हें समझा ही नहीं। प्लीज मुझे माफ कर दो। अर्जुन कुछ सेकंड तक उसे देखता रहा। उस नजर में ना नफरत थी ना शिकायत। बस एक गहरी थकान और सच्चाई थी। जैसे वह इस पल के लिए पहले से तैयार हो। जैसे उसने अपने दिल को समझा
लिया हो। वह फिर धीरे से खड़ा हुआ। कमरे में खामोशी फैल गई। इतनी गहरी कि काव्या की धड़कने तक सुनाई देने लगी। उसने शांत आवाज में कहा, “मैं तुम्हें माफ करता हूं काव्या।” यह सुनते ही काव्या की आंखों में उम्मीद की हल्की सी चमक लौट आई। जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल गया हो। उसे लगा शायद अभी भी सब खत्म नहीं हुआ है। शायद एक मौका बाकी है। लेकिन अगले ही पल अर्जुन ने कहा, लेकिन मैं वापस नहीं जा सकता। यह शब्द उसके अंदर तक उतर गए। वह वहीं ठिटक गई जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। क्यों अर्जुन? उसकी आवाज कांप रही थी। क्या हम फिर से शुरू नहीं कर सकते? अर्जुन
ने नजरें झुका ली। कुछ चीजें टूटने के बाद जुड़ती नहीं और अगर जुड़ भी जाए तो पहले जैसी रहती नहीं। उसकी आवाज में सिर्फ सच्चाई थी। कव्या के आंसू रुक नहीं रहे थे। लेकिन अब उसके पास कोई शब्द नहीं बचे थे। वह धीरे-धीरे मुड़ी और बाहर निकल गई। जैसे उसकी आखिरी उम्मीद भी वहीं छूट गई हो। बाहर सब समान था। लोग आवाजे भीड़ लेकिन उसके अंदर सब खत्म हो चुका था। उस रात वह अपने कमरे में अकेली बैठी रही। चारों तरफ सन्नाटा था और उस सन्नाटे में उसकी टूटी हुई सांसे गूंज रही थी। उसने फोन उठाया। अर्जुन की पुरानी तस्वीर खोली और रो पड़ी। काश मैंने तुम्हें समझा होता।
कुछ पल बाद उसने टेबल पर रखी नींद की गोलियां की शीशी उठाई। उसे देखा और फिर एक-एक करके सारी गोलियां खा ली। काश मैंने तुम्हें समझा होता। यह उसके आखिरी शब्द थे। अगली सुबह खबर आई कव्या अब इस दुनिया में नहीं रही। कमरे का दरवाजा बंद था और अंदर सिर्फ खामोशी थी। जब यह खबर अर्जुन तक पहुंची तो वह कुछ पल के लिए बिल्कुल चुप रह गया। उसने आंखें बंद की लेकिन कोई आंसू नहीं निकला। शायद दर्द इतना गहरा था कि आंसू भी रास्ता भूल गए थे। उसने बस खिड़की के बाहर देखा और लंबी सांस ली। इस बार सन्नाटा सिर्फ एयरपोर्ट तक सीमित नहीं था। वह एक जिंदगी खत्म होने के बाद हर तरफ
फैल चुका था। दोस्तों इस कहानी से यही सीख मिलती है कि इंसान की असली कीमत उसके कपड़ों या दिखावे से नहीं बल्कि उसके व्यवहार और दिल से होती है। जो लोग सादगी में जीते हैं वह अक्सर सबसे मजबूत होते हैं। बस हमें उन्हें समझने में देर हो जाती है और कई बार इतनी देर हो जाती है कि वापस लौटने का कोई रास्ता ही नहीं बचता। लेकिन अब आप बताइए अगर आप काव्या की जगह होते तो क्या आप भी सिर्फ पैसों और दिखावे के आधार पर अपने जीवन साथी को छोड़ देते और अगर आप अर्जुन की जगह होते तो क्या माफ करने के बाद भी उसे अपनाते या हमेशा के लिए आगे बढ़ जाते और दोस्तों काव्या को
ऊपर वाले ने जो सजा दी वह सही था या उसे इससे भी अधिक सजा मिलनी चाहिए थी कमेंट में जरूर बताएं आपकी सोच क्या कहती है और हां अगर कहानी ने आपके दिल को छू लिया हो तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें और चैनल स्टोरी बाय बीके को सब्सक्राइब जरूर करें। फिर मिलेंगे अगली वीडियो में एक नई कहानी के साथ। जय हिंद जय भारत।
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