part 2 : सास ने ऑफिस में फोन करके मेरा ₹3 लाख का परफॉर्मेंस बोनस माँग लिया, लेकिन पति की बैंक स्टेटमेंट देखकर मैंने उनका सारा सामान लिफ्ट के पास फेंक दिया! //

रोहन के हाथ में ऑफिस का बैग था।

सामने अपनी माँ का सूटकेस कॉरिडोर में देखकर उसकी आँखें फैल गईं।

“अनन्या! यह सब क्या हो रहा है? तुम मम्मी का सामान बाहर क्यों रख रही हो?” रोहन चिल्लाया।

मालती देवी तुरंत रोहन के पीछे जाकर खड़ी हो गईं और रोने का नाटक करने लगीं।

“देख रोहन! देख तेरी बीवी का बर्ताव!”

“सुबह इसने मुझे ऑफिस से फोन पर धमकी दी।”

“और अब मुझे इस उम्र में घर से बाहर फेंक रही है!”

रोहन ने आगे बढ़कर मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसका हाथ पीछे झटक दिया।

“छूना मत मुझे, रोहन,” मेरी आवाज़ में इतनी ठंडक थी कि रोहन एक पल के लिए रुक गया।

“तुम अपनी माँ के सूटकेस देख रहे हो? ज़रा यह बताओ कि पिछले तीन महीनों में हमारे जॉइंट अकाउंट से चार लाख रुपये कहाँ गए?”

रोहन का चेहरा अचानक पीला पड़ गया।

“वह… वह तो घर के खर्चों के लिए थे, अनन्या। मैंने तुम्हें बताया तो था।”

“घर के खर्चों के लिए?” मैंने एक तीखी मुस्कान के साथ कहा।

मैंने अपने बैग से अपने लैपटॉप का प्रिंटआउट निकाला।

यह मेरी पर्सनल बैंक स्टेटमेंट और हमारे जॉइंट अकाउंट की पूरी डिटेल थी, जिसे मैंने दोपहर में ही बैंक से निकलवाया था।

मैंने पन्ने सीधे रोहन के मुँह के सामने कर दिए।

“यह देखो। 15 अगस्त: ₹80,000 ट्रांसफर – मालती देवी खाते में।”

“28 अगस्त: ₹90,000 ट्रांसफर – सुरेश कुमार खाते में। सुरेश कौन है? तुम्हारी मौसी का लड़का, सही कहा न?”

“10 सितंबर: ₹1,200,000 ट्रांसफर – मालती देवी खाते में।”

“और तुम मुझे बता रहे थे कि यह राशन और सोसाइटी मेंटेनेंस का खर्चा है?”

मालती देवी ने तुरंत बात बदलने की कोशिश की।

“रोहन मेरा बेटा है! अगर उसने अपनी माँ और भाई-बहनों की मदद कर दी तो इसमें क्या गुनाह कर दिया?”

“तुम तो वैसे भी महीने के डेढ़ लाख कमाती हो! क्या तुम इतने में ही मर रही हो?”

“गुनाह यह है मम्मीजी,” मैंने मालती देवी की तरफ देखते हुए कहा, “कि यह पैसा रोहन की कमाई का नहीं था।”

“रोहन की सैलरी हर महीने ₹60,000 है, जिसमें से ₹35,000 हमारे फ्लैट की EMI में जाते हैं।”

“बाकी ₹25,000 में घर का राशन भी पूरा नहीं होता।”

“संयुक्त खाते में हर महीने ₹1,500,000 मेरी तरफ से जमा होते हैं!”

“यानी आप लोग जो पैसा अपनी रिश्तेदारों में बाँट रहे थे, वह मेरी मेहनत की कमाई थी!”

रोहन ने बात संभालने के लिए अपनी आवाज़ ऊँची की।

“अनन्या, शादी के बाद तेरा और मेरा कुछ अलग नहीं होता! हम एक परिवार हैं।”

“अच्छा? परिवार?” मैंने लैपटॉप खोला और उसकी स्क्रीन रोहन की तरफ घुमा दी।

“तो फिर इस दूसरे बैंक अकाउंट के बारे में क्या ख्याल है?”

रोहन की आँखें डर से चौड़ी हो गईं।

उसके माथे पर पसीना आ गया।

“यह… यह क्या है?” रोहन की आवाज़ लड़खड़ाने लगी।

“यह तुम्हारा पर्सनल अकाउंट है जो तुमने छह महीने पहले आईसीआईसीआई बैंक में खोला था,” मैंने शांत लेकिन कड़े शब्दों में कहा।


“जब मैंने बैंक मैनेजर से बात की और अपने सीए के ज़रिये तुम्हारी टैक्स डिटेल निकाली, तो मुझे यह मिला।”

“मेरी दी हुई रकम में से तुम हर महीने अपनी माँ को पैसे भेजते थे।”

“और तुम्हारी माँ वही पैसे वापस तुम्हारे इस गुप्त खाते में एफडी के रूप में जमा करा रही थीं!”

“ताकि कल को अगर हमारा तलाक हो, तो तुम कह सको कि तुम्हारे पास कोई बचत नहीं है और सारा पैसा तुम्हारी माँ का है!”

यह सुनते ही मालती देवी का चेहरा पूरी तरह उतर गया।

कॉरिडोर में खड़े आसपास के दो पड़ोसियों ने भी अपने दरवाज़े थोड़े खोल लिए थे और यह सब सुन रहे थे।

“रोहन, क्या यह सच है?” मैंने सीधे उसकी आँखों में देखकर पूछा।

“तुम और तुम्हारी माँ मिलकर पिछले छह महीने से मेरे खिलाफ यह योजना बना रहे थे?”

“और जब उससे भी तुम्हारा पेट नहीं भरा, तो तुमने आज मेरी कंपनी के बोनस पर नज़र डाली?”

रोहन के पास बोलने के लिए कोई शब्द नहीं बचे थे।

वह सिर्फ ज़मीन की तरफ देखने लगा।

मालती देवी ने अब अपनी रणनीति बदली।

वह झूठी हमदर्दी दिखाते हुए आगे आईं।

“अनन्या बेटा… मेरी बात सुनो। रोहन से गलती हो गई।”

“हम तो बस भविष्य के लिए थोड़ा बचा रहे थे।”

“तुम इतनी समझदार हो, घर की बात बाहर क्यों निकाल रही हो?”

“अंदर चलो, बैठकर बात करते हैं।”

मैंने मालती देवी का हाथ झटक दिया।

“घर की बात?” मैंने कहा।

“यह घर मेरा है। इस फ्लैट के कागजात पर सिर्फ मेरा नाम है और इसकी डाउन पेमेंट मेरे पिता ने अपनी रिटायरमेंट के पैसों से दी थी।”

“आपने मुझे सिर्फ एक कमाई करने वाली मशीन समझा।”

“आपने सोचा कि मैं दिन-रात ऑफिस में काम करूंगी और आप लोग पीछे से मेरी कमाई उड़ाएंगे।”

मैंने अपने फोन से एक नंबर मिलाया।

“हेलो, पुलिस स्टेशन? मैं बानेर की ‘ग्रीन एकर्स’ सोसाइटी से बोल रही हूँ।”

“मेरे घर में कुछ लोग बिना मेरी अनुमति के रह रहे हैं और वित्तीय धोखाधड़ी का मामला है।”

यह सुनते ही रोहन घबरा गया।

“अनन्या! तुम पुलिस को क्यों फोन कर रही हो? तुम पागल हो गई हो क्या?”

“मैं बिल्कुल होश में हूँ, रोहन,” मैंने फोन कान से लगाकर कहा।

“अगर मम्मीजी अगले दस मिनट में अपना बाकी सामान लेकर इस घर से बाहर नहीं निकलीं, तो मैं फ्रॉड और मेंटल हैरेसमेंट की एफआईआर दर्ज करवाऊँगी।”

“और मेरे पास बैंक के सारे सबूत मौजूद हैं।”

मालती देवी को समझ आ गया था कि अब खेल खत्म हो चुका है।

उनकी चालाकी और रौब पूरी तरह गायब हो चुके थे।

उन्होंने तुरंत रोहन का हाथ पकड़ा।

“रोहन! चल यहाँ से! ऐसी घमंडी औरत के साथ एक मिनट भी नहीं रहना!”

“हम अभी जयपुर वापस जा रहे हैं!”

“जयपुर जाने के लिए भी पैसे नहीं हैं मम्मीजी,” मैंने ठंडे लहजे में कहा।

“मैंने आज दोपहर ही जॉइंट अकाउंट से अपना नाम हटा लिया है और उस खाते को ब्लॉक करवा दिया है।”

“आपके पास सिर्फ रोहन के पर्सनल अकाउंट का कार्ड है, जिसमें अभी सिर्फ ₹4,000 बचे हैं।”

रोहन ने तुरंत अपना फोन निकालकर बैंक ऐप खोला।

खाता सचमुच ब्लॉक था।

रोहन ने हताशा से मुझे देखा।

“अनन्या… प्लीज, ऐसा मत करो। हम बात कर सकते हैं।”

“बात करने का समय छह महीने पहले था, रोहन। जब तुमने पहली बार मुझसे झूठ बोलकर अपनी माँ के खाते में पैसे भेजे थे।”

मैंने मालती देवी का तीसरा बैग भी उठाकर कॉरिडोर में रख दिया।

“रोहन, तुम्हारा सामान भी मैं कल सुबह तुम्हारे ऑफिस भिजवा दूंगी।”

“मेरे वकील का फोन तुम्हारे पास कल सुबह 10 बजे तक पहुँच जाएगा।”

“तलाक के कागज़ात तैयार हैं।”

मालती देवी ने चिल्लाने की कोशिश की, “तुम मेरे बेटे को तलाक दोगी? इसकी दूसरी शादी कराऊँगी मैं!”

“जरूर कराइए मम्मीजी,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा।

“लेकिन इस बार किसी ऐसी लड़की से कराइएगा जो आपकी और आपके बेटे की चलाकियों का बिल भर सके।”

मैंने फ्लैट का मुख्य दरवाज़ा ज़ोर से बंद कर दिया।

अंदर आकर मैंने दरवाज़े का लॉक लगा दिया।

बाहर से मालती देवी के चिल्लाने और रोहन के दरवाज़ा खटखटाने की आवाज़ आ रही थी।

लेकिन कुछ ही मिनटों में लिफ्ट की आवाज़ आई और बाहर पूरी तरह सन्नाटा छा गया।

मैंने अपने लिविंग रूम की खिड़की से बाहर देखा।

पुणे शहर की रोशनी जगमगा रही थी।

चार महीनों में पहली बार मुझे अपने ही घर में शांति और सुकून का अहसास हो रहा था।

मेरी मेहनत का पैसा अब सुरक्षित था, और सबसे बढ़कर, मेरी आत्मसम्मान की जीत हुई थी।

मैंने अपने लैपटॉप पर जाकर अपने बोनस का ₹3,000,000 सीधे अपने फिक्स्ड डिपॉजिट में ट्रांसफर कर दिया।

यह मेरी मेहनत थी, और इसका हक सिर्फ और सिर्फ मेरा था।

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