कचरा गाड़ी के ओझल होते ही रोहन अपनी ऑडी कार में बैठा।
उसकी उंगलियाँ स्टीयरिंग व्हील पर काँप रही थीं।
सिमरन कार का दरवाज़ा खोलकर अंदर बैठी।
“तुम उस कचरा उठाने वाली की बातों को सच मान रहे हो, रोहन?” सिमरन ने चिढ़कर कहा।
“वह सिर्फ तुमसे पैसे ऐंठने आई है। 6 साल बाद अचानक बच्चों का नाटक रच रही है।”
रोहन ने सिमरन की तरफ देखा।
उसके मन में पहली बार शक का बीज बोया जा चुका था।
“वह झूठ नहीं बोल रही थी सिमरन। उसकी आँखों में गुस्सा था, लालच नहीं।”
“तुम्हें क्या फर्क पड़ता है?” सिमरन ने अपनी आवाज़ ऊँची की। “कल हमारी कंपनी की 50 करोड़ रुपये की डील फाइनल होने वाली है। तुम्हें उस पर ध्यान देना चाहिए, ना कि उस औरत पर।”
रोहन ने कार स्टार्ट की, लेकिन उसका मन सिविल लाइंस के बंगले में नहीं था।
उसे 6 साल पुरानी वह रात याद आने लगी।
2020 की वह ठंडी रात, जब रिया को फेफड़ों में गंभीर संक्रमण हुआ था।
रिया अस्पताल में भर्ती थी।
तभी सिमरन और रोहन की माँ मोहिनी देवी ने रोहन के कान भरे थे।
उन्होंने दावा किया था कि रिया कंपनी के 5 करोड़ रुपये अपने भाई के खाते में ट्रांसफर कर रही है।
रोहन ने बिना जांच किए रिया के मेडिकल कागज़ात पर दस्तखत करने से मना कर दिया था।
अस्पताल का बिल न भरने के कारण रिया को बाहर निकाल दिया गया था।
और जब वह घर पहुँची, तो रोहन ने उसके हाथ में तलाक के कागज़ थमा दिए थे।
रोहन ने कार सीधे अपने प्राइवेट डिटेक्टिव विकास के दफ़्तर की तरफ मोड़ दी।
विकास रोहन का पुराना जानकार था।
“विकास, मुझे रोहिणी इलाके के शाहदरा ब्लॉक का 1 एड्रेस ट्रेस करना है,” रोहन ने टेबल पर 50,000 रुपये नकद रखे।
“नाम रिया वर्मा है। मुझे 2 घंटे के अंदर उसकी पूरी जानकारी चाहिए। उसके बच्चों की भी।”
विकास ने नोट उठाए और कंप्यूटर पर काम शुरू कर दिया।
केवल 1 घंटे 45 मिनट बाद, विकास ने 1 फ़ाइल रोहन के सामने रख दी।
“रोहन भाई, जो जानकारी निकली है, वह चौंकाने वाली है।”
रोहन ने फ़ाइल खोली।
पहला पन्ना शाहदरा के एक छोटे सरकारी अस्पताल का बर्थ सर्टिफिकेट था।
तारीख: 14 नवंबर 2020।
बच्चे: कबीर मेहरा और मायरा मेहरा।
पिता का नाम: रोहन मेहरा।
रोहन की आँखों के सामने धुंध छाने लगी।
सर्टिफिकेट पर साफ़-साफ़ उसका नाम लिखा था।
फ़ाइल के दूसरे पन्ने पर 2 बच्चों की तस्वीरें थीं।
5 साल का कबीर बिल्कुल रोहन के बचपन जैसा दिखता था। वही आँखें, वही घुंघराले बाल।
और छोटी मायरा की मुस्कान बिल्कुल रिया जैसी थी।
तीसरे पन्ने पर 1 और दस्तावेज़ था—2020 का बैंक स्टेटमेंट।
रोहन ने ध्यान से देखा।
6 साल पहले जिस 5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप रिया पर लगा था, वह पैसा उसके भाई के खाते में नहीं गया था।

वह पैसा सिमरन के भाई, विवेक कपूर के शेल अकाउंट में ट्रांसफर हुआ था।
दस्तखत रोहन की माँ मोहिनी देवी के थे।
रोहन के हाथ से फ़ाइल छूटकर ज़मीन पर गिर गई।
“यह… यह क्या है?” रोहन की आवाज़ हकलाने लगी।
विकास ने गंभीरता से कहा, “तुम्हारी मौजूदा पत्नी सिमरन और तुम्हारी माँ ने मिलकर रिया को फँसाया था।”
“रिया के भाई का खाता नंबर फर्जी कागज़ों में बदला गया था।”
“जैसे ही रिया घर से बाहर हुई, 5 करोड़ रुपये सिमरन के भाई के खाते में चले गए।”
“और रिया? उसने 6 साल तक किसी से एक पैसा नहीं माँगा। वह नगर निगम में 12,000 रुपये महीने की नौकरी करके अपने बच्चों को पाल रही है।”
रोहन के पैरों तले से ज़मीन निकल गई।
उसने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं।
जिस औरत को उसने चोर और धोखेबाज़ समझा, वह बेगुनाह थी।
और जिसे उसने अपनी जीवनसंगिनी बनाया, वह असली गुनहगार थी।
रोहन तुरंत दफ़्तर से बाहर निकला।
उसने गाड़ी रोहिणी की तंग गलियों की तरफ दौड़ा दी।
शाहदरा का ब्लॉक सी, गली नंबर 4।
यहाँ बड़ी गाड़ियाँ नहीं जा सकती थीं।
रोहन अपनी महँगी कार सड़क पर छोड़कर पैदल ही संकरी गली में आगे बढ़ा।
चारों तरफ नालियों की बदबू, उड़ती धूल और टूटे हुए मकान थे।
मकान नंबर 42 के सामने पहुँचकर रोहन रुक गया।
1 छोटा सा कमरा, जिसकी छत पर टीन की चादर पड़ी थी।
दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर रिया एक छोटे से स्टूल पर बैठी थी।
सामने 2 बच्चे लकड़ी की टूटी मेज पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे।
“मम्मा, आज स्कूल में मैडम ने कहा कि अगर कल तक 1,500 रुपये फीस जमा नहीं हुई, तो परीक्षा में नहीं बैठने देंगे,” कबीर ने मासूमियत से कहा।
रिया ने कबीर के सिर पर हाथ फेरा।
“तुम चिंता मत करो बेटा। मम्मा ने आज ओवरटाइम किया है। शाम को पैसे मिल जाएँगे।”
मायरा ने अपनी टूटी हुई गुड़िया दिखाते हुए कहा, “मम्मा, जब पैसे आएँगे तो क्या मेरी गुड़िया का हाथ ठीक करने के लिए गोंद लाओगी?”
रिया ने मुस्कुराकर दोनों को गले से लगा लिया।
“हाँ मेरी बच्ची, सब ठीक हो जाएगा।”
दरवाज़े पर खड़े रोहन की आँखों से आँसू बहने लगे।
वह आदमी जिसने 100 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स साइन किए थे, आज 1,500 रुपये की फीस के लिए अपने बच्चों को तरसते देख रहा था।
रोहन ने दरवाज़ा पूरी तरह खोला और अंदर कदम रखा।
रिया ने चौंककर ऊपर देखा।
उसका चेहरा सख्त हो गया।
“तुम यहाँ क्या कर रहे हो रोहन? यह तुम्हारा ग्रेटर कैलाश नहीं है। बाहर निकलो।”
कबीर और मायरा डरकर अपनी माँ के पीछे छिप गए।
रोहन घुटनों के बल ज़मीन पर बैठ गया।
फर्श की धूल उसके 1 लाख रुपये के पेंट पर लग गई, लेकिन उसे कोई परवाह नहीं थी।
“रिया… मुझे माफ़ कर दो…” रोहन की आवाज़ काँप रही थी।
“मुझे सब पता चल गया है। बर्थ सर्टिफिकेट, बैंक के कागज़ात… सब कुछ।”
रिया ने ठंडी नज़रों से उसे देखा।
“पता चल गया? 6 साल बाद?”
“रिया, मैं अपनी गलती सुधारना चाहता हूँ। तुम और बच्चे मेरे साथ बड़े बंगले में चलो। मैं तुम्हें दुनिया की हर खुशी दूँगा।”
रिया ज़ोर से हँसी।
यह हँसी गुस्से और दर्द से भरी थी।
“ख़ुशी? रोहन, जब 6 साल पहले मुझे दवाइयों की ज़रूरत थी, तब तुम कहाँ थे?”
“जब यह दोनों बच्चे ठंड में बिना दूध के रोते थे, तब तुम्हारी दौलत कहाँ थी?”
“आज तुम आए हो क्योंकि तुम्हारा ज़मीर जाग गया? या इसलिए कि तुम्हें सच का पता चल गया?”
कबीर ने रिया का हाथ पकड़ा। “मम्मा, यह अंकल कौन हैं? यह क्यों रो रहे हैं?”
रिया ने कबीर को देखा, फिर रोहन की तरफ मुड़ी।
“इन बच्चों के पिता 6 साल पहले मर चुके हैं, कबीर। यह सिर्फ एक अजनबी हैं।”
रोहन ने तड़पकर कहा, “रिया! मैं इनका बाप हूँ! मैं इन्हें अपना नाम दूँगा!”
“इन्हें तुम्हारे नाम की ज़रूरत नहीं है रोहन मेहरा,” रिया ने साफ़ शब्दों में कहा।
“इनके बर्थ सर्टिफिकेट पर तुम्हारा नाम ज़रूर है, लेकिन इनके वजूद पर सिर्फ मेरी मेहनत का पसीना है।”
“तुम पैसे से सब कुछ खरीद सकते हो, लेकिन इन 6 सालों का दर्द नहीं खरीद सकते।”
तभी बाहर 2 पुलिस की गाड़ियाँ आकर रुकीं।
सायरन की आवाज़ से पूरी गली इकट्ठा हो गई।
गाड़ी से रोहिणी थाने के सीनियर इंस्पेक्टर वर्मा बाहर निकले।
उनके साथ 2 महिला कांस्टेबल भी थीं।
रोहन हैरान होकर खड़ा हो गया।
“यह सब क्या है?” रोहन ने पूछा।
तभी पुलिस की गाड़ी के पीछे से 1 और कार रुकी।
उसमें से रोहन की माँ मोहिनी देवी और सिमरन रोते हुए बाहर निकलीं।
उनके हाथों में हथकड़ियाँ लगी थीं।
सिमरन ने चिल्लाकर कहा, “रोहन! बचाओ हमें! इस औरत ने हम पर केस कर दिया है!”
रोहन ने हैरान होकर रिया को देखा।
रिया ने अपनी अलमारी से 1 फ़ाइल निकाली।
“तुम्हें क्या लगा रोहन? कि मैं 6 साल तक सिर्फ कचरा उठा रही थी?”
“मैं हर दिन सबूत जुटा रही थी।”
रिया ने फ़ाइल इंस्पेक्टर वर्मा को सौंपी।
“यह है 2020 का वह जालसाज़ी का मामला। सिमरन कपूर और मोहिनी मेहरा ने मेरे फर्जी दस्तखत बनाकर कंपनी से 5 करोड़ रुपये चुराए थे।”
“और यह है वह मेडिकल रिपोर्ट, जिसमें साबित होता है कि इन्होंने मुझे ज़हर जैसा हैवी सेडेटिव देकर कागज़ों पर अंगूठा लगवाया था।”
“मेरे पास अस्पताल के उस डॉक्टर का कबूलनामा भी है जिसे इन्होंने रिश्वत दी थी।”
इंस्पेक्टर वर्मा ने कागज़ात देखे और रोहन की तरफ पलटे।
“रोहन मेहरा, आपकी पत्नी सिमरन और आपकी माँ मोहिनी देवी पर धोखाधड़ी, जालसाज़ी और जान से मारने की साज़िश का मामला दर्ज हुआ है।”
“और आपके खिलाफ भी जांच होगी कि आप इस साज़िश में शामिल थे या नहीं।”
रोहन का दिमाग सुन्न हो गया।
उसकी माँ मोहिनी देवी रोने लगीं। “रोहन बेटा! इसे रोक! यह बहु हमें जेल भिजवा रही है!”
रोहन ने अपनी माँ का हाथ झटका।
“आपने 6 साल पहले मुझसे झूठ बोला था माँ। आपने 1 बेगुनाह औरत की ज़िंदगी बर्बाद कर दी।”
“रोहन!” सिमरन चिल्लाई। “तुम उस कचरे वाली का साथ दोगी?”
रोहन ने सिमरन के थप्पड़ मारने के लिए हाथ उठाया, लेकिन रोक लिया।
“यह कचरे वाली नहीं है सिमरन। यह मेरे बच्चों की माँ है। और तुम… तुम एक अपराधी हो।”
पुलिस सिमरन और मोहिनी देवी को गाड़ी में बैठाकर ले गई।
गली में सन्नाटा छा गया।
रोहन अकेला खड़ा रह गया।
उसकी कंपनी की साख खत्म हो चुकी थी। 50 करोड़ की डील रद्द होने वाली थी। उसकी माँ और पत्नी जेल जा चुकी थीं।
रोहन ने रिया की तरफ देखा।
“रिया… मुझे 1 मौका दो। मैं बच्चों के लिए प्रायश्चित करना चाहता हूँ।”
रिया ने अपने दोनों बच्चों का हाथ पकड़ा।
“प्रायश्चित का मौका इंसान को तब मिलता है जब उसने अनजाने में गलती की हो।”
“तुमने जानबूझकर मुझे मरने के लिए छोड़ा था।”
“कल सुबह 10:00 बजे कोर्ट आ जाना। मुझे तुमसे तलाक चाहिए। और बच्चों की कस्टडी पूरी तरह मेरी होगी।”
“रिया, मैं तुम्हें अपना आधा साम्राज्य दे दूंगा!” रोहन ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।
रिया ने शांत आवाज़ में कहा, “मुझे तुम्हारा 1 रुपया भी नहीं चाहिए। मैं अपनी मेहनत से कमाती हूँ और अपने बच्चों को पालती हूँ।”
“तुम अपनी दौलत अपने पास रखो रोहन। क्योंकि आज तुम्हारे पास पैसे तो बहुत हैं, लेकिन कोई अपना नहीं है।”
रिया ने अपने घर का दरवाज़ा रोहन के मुँह पर बंद कर लिया।
अंदर से कबीर की आवाज़ आई, “मम्मा, क्या हम कल सच में परीक्षा देंगे?”
रिया की आवाज़ आई, “हाँ मेरे शेर, तुम परीक्षा भी दोगे और अव्वल भी आओगे।”
रोहन उस बंद दरवाज़े के बाहर अकेला खड़ा रहा।
धूल भरी गली में रात का अंधेरा घिर आया था।
जिस औरत को उसने 6 साल पहले कचरा समझकर सड़क पर फेंका था, आज उसी औरत ने उसकी झूठी शानो-शौकत को कचरे के ढेर में बदल दिया था।
रोहन घुटनों के बल बैठ गया, लेकिन इस बार उसे उठाने वाला कोई नहीं था।
